प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मास्को यात्रा

मॉस्को यात्रा: 8 और 9 जुलाई, 2024

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 8 और 9 जुलाई को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने के लिए मास्को की यात्रा का उद्देश्य भारत-रूस संबंधों में “दूरी” की धारणा को समाप्त करना है, ऐसा विशेषज्ञों का कहना है। यह यात्रा रणनीतिक, आर्थिक और सैन्य संबंधों पर केंद्रित होने की उम्मीद है।

यात्रा के प्रमुख बिंदु

व्यापार और आर्थिक संबंध

मोदी-पुतिन वार्ता में भारत-रूस व्यापार में वृद्धि, विशेष रूप से भारत के तेल आयात के कारण, और पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण उत्पन्न भुगतान समस्याओं को सुलझाने पर चर्चा होगी। चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग और रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट (RELOS) पर भी बातचीत होगी, जो रक्षा आदान-प्रदान के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।

पिछली मुलाकातें

यह यात्रा 2015 के बाद पहली बार मोदी की मास्को यात्रा होगी और दशकों पुराने वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन प्रारूप की वापसी को चिह्नित करेगी। मोदी ने 2017 में सेंट पीटर्सबर्ग, 2018 में सोची और 2019 में व्लादिवोस्तोक में पुतिन से मुलाकात की थी। इसके अलावा, दोनों नेता 2022 में उज्बेकिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे।

विशेषज्ञों की राय

पूर्व मास्को में भारतीय राजदूत वेंकटेश वर्मा के अनुसार, “COVID और तेजी से बदलती अंतर्राष्ट्रीय स्थिति के कारण शिखर सम्मेलनों में आए अंतराल को समाप्त करना आवश्यक है। यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों में आए बदलाव की धारणा को समाप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।” उन्होंने बताया कि यात्रा समय पर है और रणनीतिक साझेदारी को पुनर्जीवित करने के लिए अत्यावश्यक है।

यात्रा के प्रबंध

सूत्रों के अनुसार, मोदी के कार्यक्रम का अंतिम विवरण अभी भी तय किया जा रहा है, और विदेश मंत्रालय और सुरक्षा टीम मास्को में तैयारी कर रही हैं। इस यात्रा की अभी औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

संकेत और संदेश

यह यात्रा मोदी का तीसरे कार्यकाल में विदेश में पहला द्विपक्षीय दौरा होने की संभावना है, जो रूस को भारत के सबसे करीबी पड़ोसियों के बराबर रखेगी। यह यात्रा पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका और यूरोप को भी यह संदेश देगी कि मोदी भारत के संबंधों को संतुलित करने का इरादा रखते हैं, जबकि रूस-यूक्रेन संघर्ष जारी है।

अन्य योजनाएं

हालांकि सरकार ने मोदी के कीव दौरे की योजना की घोषणा नहीं की है, लेकिन वह 9 और 10 जुलाई के बीच वियना यात्रा करेंगे। मॉस्को की यात्रा से यह संकेत भी मिल सकता है कि मोदी बहुपक्षीय शिखर सम्मेलनों की तुलना में द्विपक्षीय संबंधों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

यात्रा के उद्देश्य

विशेषज्ञों का कहना है कि इस यात्रा से मोदी को रूस के यूक्रेन युद्ध की स्थिति का “पहला हाथ” अनुभव मिलेगा और भारतीयों को रूसी सेना में भर्ती किए जाने के मुद्दे, रक्षा हार्डवेयर और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति में तेजी लाने पर चर्चा होगी।

विशेषज्ञों की टिप्पणी

स्कॉलर और ओआरएफ के विशिष्ट साथी नंदन उन्नीकृष्णन ने कहा, “यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनीतिक संबंधों में आई शंकाओं को दूर करेगी और लंबित मुद्दों को हल करने में मदद करेगी।”

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा, “मोदी की यात्रा रूस की रणनीतिक विदेश नीति में पूरी तरह फिट बैठती है।”

आर्थिक और वाणिज्यिक चर्चाएं

भारतीय और रूसी अधिकारी चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग और साइबेरिया में निवेश बढ़ाने पर चर्चा कर रहे हैं। भारत रूस से खनिज स्रोत करना चाहता है, और इसमें बीमा, और मध्यवर्ती बंदरगाहों के साथ बातचीत शामिल है।

इस प्रकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मास्को यात्रा न केवल भारत-रूस संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भी एक महत्वपूर्ण संदेश देगी।

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