🟦 GS PAPER–II (अंतरराष्ट्रीय संबंध)
प्रश्न (संभावित): “वेनेज़ुएला संकट के संदर्भ में पेट्रोडॉलर व्यवस्था की भूमिका का विश्लेषण कीजिए तथा इसके वैश्विक शक्ति संतुलन पर प्रभावों की चर्चा कीजिए।” (250 शब्द)
उत्तर:
वेनेज़ुएला संकट को प्रायः लोकतंत्र, मानवाधिकार या मादक पदार्थों की तस्करी से जोड़कर देखा जाता है, किंतु इसका वास्तविक संदर्भ वैश्विक शक्ति-संतुलन और अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व से जुड़ा है। इस संदर्भ में पेट्रोडॉलर व्यवस्था की भूमिका केंद्रीय है।
1974 में अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुए समझौते के अनुसार वैश्विक तेल व्यापार को अमेरिकी डॉलर में मूल्यांकित किया गया। इससे डॉलर के लिए कृत्रिम किंतु स्थायी वैश्विक मांग उत्पन्न हुई, जिसने अमेरिका को वित्तीय, सैन्य और कूटनीतिक वर्चस्व प्रदान किया।
वेनेज़ुएला के पास विश्व का सर्वाधिक तेल भंडार है। 2018 के बाद उसने डॉलर के बजाय युआन, यूरो और रूबल में तेल व्यापार प्रारंभ किया तथा BRICS में शामिल होने की पहल की। यह कदम पेट्रोडॉलर व्यवस्था के लिए प्रत्यक्ष चुनौती था। ऐतिहासिक रूप से इराक और लीबिया जैसे उदाहरण दर्शाते हैं कि पेट्रोडॉलर को चुनौती देने वाले देशों को राजनीतिक अस्थिरता और बाह्य हस्तक्षेप का सामना करना पड़ा है।
वेनेज़ुएला संकट ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में निम्न प्रभाव डाले हैं:
अमेरिका और BRICS देशों के बीच भू-राजनीतिक तनाव में वृद्धि
विकासशील देशों में डीडॉलराइजेशन की बहस को बल
वैश्विक वित्तीय व्यवस्था के बहुध्रुवीय होने की प्रक्रिया तेज़
इस प्रकार, वेनेज़ुएला संकट केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन का प्रतीक है, जहाँ आर्थिक प्रभुत्व और राजनीतिक हस्तक्षेप परस्पर गहराई से जुड़े हुए हैं।
