🟩 GS PAPER–III (वैश्विक अर्थव्यवस्था)
Questions and their Model Answers
प्रश्न (संभावित): “डीडॉलराइजेशन की बढ़ती प्रवृत्ति के संदर्भ में वेनेज़ुएला संकट का विश्लेषण कीजिए। यह वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है?” (250 शब्द)
उत्तर:
डीडॉलराइजेशन का अर्थ है अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विशेषकर ऊर्जा व्यापार, में अमेरिकी डॉलर की निर्भरता को कम करना। हाल के वर्षों में रूस, चीन, ईरान और BRICS देशों द्वारा स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में वेनेज़ुएला संकट का आर्थिक महत्व बढ़ जाता है।
वेनेज़ुएला विश्व का सबसे बड़ा तेल-भंडार धारक देश है। जब उसने डॉलर के बजाय युआन और अन्य मुद्राओं में तेल व्यापार प्रारंभ किया, तो यह केवल आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि वैश्विक मौद्रिक व्यवस्था को चुनौती थी। यदि इतने बड़े तेल उत्पादक देश द्वारा गैर-डॉलर व्यापार सफल होता, तो यह अन्य देशों के लिए भी प्रेरणा बन सकता था।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके प्रमुख प्रभाव निम्न हैं:
पेट्रोडॉलर व्यवस्था की स्थिरता पर दबाव
वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों (जैसे CIPS, mBridge) को प्रोत्साहन
अमेरिकी वित्तीय प्रतिबंधों की प्रभावशीलता में कमी
बहुध्रुवीय आर्थिक व्यवस्था की ओर संक्रमण
हालाँकि, डीडॉलराइजेशन की प्रक्रिया क्रमिक और जटिल है। डॉलर की स्थिरता, गहराई वाले वित्तीय बाज़ार और संस्थागत विश्वास अभी भी उसे प्रमुख वैश्विक मुद्रा बनाए हुए हैं।
अतः वेनेज़ुएला संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था में उभरते बदलावों का संकेतक है, जहाँ डॉलर का पूर्ण प्रभुत्व धीरे-धीरे चुनौती के दौर में प्रवेश कर रहा है, किंतु उसका त्वरित अंत संभव नहीं है।
